भोपाल: 7 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा कृषि विस्तार से जुड़े मैदानी कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों ने विभाग में हाल ही में हुए स्थानांतरण और सार्थक (Sarthak) ऐप के माध्यम से अनिवार्य उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग के मंत्री लखन पटेल को ज्ञापन सौंपकर ऐप आधारित उपस्थिति व्यवस्था को समाप्त करने तथा स्थानांतरण संबंधी निर्णयों पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
कर्मचारियों का आरोप है कि सार्थक ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने की अनिवार्यता के कारण उन्हें फील्ड में कार्य करने के दौरान अनेक व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि विभाग का अधिकांश कार्य दूरस्थ ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में होता है, जहां मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी की स्थिति बेहद कमजोर रहती है। ऐसे में कई बार समय पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना संभव नहीं हो पाता, जिसके चलते उनकी उपस्थिति कम दर्ज की गई और बाद में इसे आधार बनाकर दंडात्मक कार्रवाई के रूप में स्थानांतरण किए गए।
पशुपालन विभाग की अधिकारी बबीता त्रिपाठी के नेतृत्व में कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों के प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि विभागीय कार्यों की प्रकृति को देखते हुए सार्थक ऐप के माध्यम से अनिवार्य उपस्थिति दर्ज कराना व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल कर्मचारियों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को दी जाने वाली सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है।
ज्ञापन में बताया गया कि पशु चिकित्सकों और मैदानी कर्मचारियों का कार्यक्षेत्र कई पशु चिकित्सालयों, उपकेंद्रों और दर्जनों गांवों तक फैला होता है। मूक पशुओं की चिकित्सा का कोई निर्धारित समय नहीं होता और आपात स्थिति में कर्मचारियों को दिन-रात कभी भी सेवाएं देनी पड़ती हैं। कई बार देर रात तक फील्ड में रहकर उपचार करना पड़ता है, जिससे निर्धारित समय पर ऐप आधारित उपस्थिति दर्ज कर पाना कठिन हो जाता है।
महिला कर्मचारियों और अधिकारियों ने भी इस व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि दूरदराज के क्षेत्रों में लगातार भ्रमण करने और निश्चित समयावधि में उपस्थिति दर्ज करने की बाध्यता के कारण सुरक्षा और व्यावहारिक दोनों प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने महिला कर्मचारियों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किए जाने की मांग की है।
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि पशु चिकित्सा सेवाओं के अलावा उन्हें समय-समय पर सर्वेक्षण, जनगणना, जागरूकता अभियान और अन्य शासकीय कार्यों में भी लगाया जाता है। ऐसे में फील्ड आधारित कार्यप्रणाली के बीच ऐप आधारित उपस्थिति प्रणाली अतिरिक्त दबाव का कारण बन रही है।
विभिन्न कर्मचारी संगठनों और संघों ने सरकार से मांग की है कि मैदानी कार्य की वास्तविक परिस्थितियों, नेटवर्क की उपलब्धता और विभागीय जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए पशुपालन विभाग एवं कृषि विस्तार से जुड़े कर्मचारियों को सार्थक ऐप की अनिवार्यता से छूट दी जाए। साथ ही, उपस्थिति संबंधी कारणों से किए गए स्थानांतरणों की समीक्षा कर कर्मचारियों को राहत प्रदान की जाए।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे। फिलहाल सरकार या विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कर्मचारियों को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

More Stories
रसूखदारों और भ्रष्ट तंत्र की मिलीभगत का पर्याय सिद्धांता हॉस्पिटल
भीषण अग्निकांड: भ्रस्टाचार की बलि चढ़ते लोग, क्या कभी प्रशासन लेगा सबक
एम्स भोपाल के आयुष विभाग ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में तीन सप्ताहीय योग गतिविधियों का शुभारंभ किया