भोपाल: 24 जनवरी 2025
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के मार्गदर्शन में, संस्थान ने मातृ दूध पोषण प्रक्रिया के महत्व पर एक महत्वपूर्ण चर्चा आयोजित की। इस सत्र में नवजात शिशु विभाग के डॉक्टरों और प्रसूति वार्ड की नर्सों की एक समर्पित टीम शामिल हुई। चर्चा में विशेष रूप से स्तनपान को एक राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में रेखांकित किया गया और सफल स्तनपान प्रथाओं को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदमों पर प्रकाश डाला गया। इस प्रक्रिया की शुरुआत गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को स्तनपान के बारे में शिक्षित करने से होती है और यह प्रसव के बाद निरंतर मार्गदर्शन के साथ जारी रहती है। प्रसव के बाद, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि माँ और नवजात शिशु को बिना किसी बाधा के एक साथ रखा जाए ताकि स्तनपान को प्रोत्साहन मिल सके। यह निरंतर संपर्क माँ और बच्चे के संबंध को मजबूत करता है और यह सुनिश्चित करता है कि शिशु को केवल माँ का दूध ही मिले, जो शिशु के विकास और वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है। मुख्य अनुशंसाएं जिन पर चर्चा की गई, उनमें शामिल हैं: अस्पताल से छुट्टी से पहले प्रत्येक शिशु के पोषण की दोबारा जाँच करना और माँ की सभी शंकाओं का समाधान करना, चिकित्सा कारणों को छोड़कर हर समय बच्चे को मां की नज़र में रखना। इसके अलावा माँ को आश्वस्त करने के लिए नवजात शिशु की जाँच माँ की उपस्थिति में करना। पूरे परिवार को स्तनपान प्रक्रिया के बारे में शिक्षित करना ताकि भ्रांतियों को दूर किया जा सके और एक सहायक वातावरण बनाया जा सके। रात में बार-बार स्तनपान कराना और प्रत्येक सत्र में शिशु को दोनों स्तनों से दूध पिलाना भी महत्वपूर्ण है। शिशु के पर्याप्त वृद्धि और विकास को सुनिश्चित करने के लिए पहले महीने में तीन बार वजन की जाँच करना और माताओं को स्तनपान में चुनौतियों का सामना करने पर नजदीकी अस्पतालों से सहायता लेने की सलाह दी गयी।
प्रो. सिंह ने स्तनपान के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “माँ का दूध नवजात शिशु के लिए सबसे प्राकृतिक और लाभकारी पोषण है। यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक शिशु को विशेष रूप से माँ का दूध ही मिले, हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। एम्स भोपाल इस राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए माताओं और उनके परिवारों को आवश्यक समर्थन और शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।” नवजात शिशु की देखभाल प्रसवोत्तर स्वास्थ्य सेवा का एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण पहलू है। यह माता और शिशु के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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