एम्स भोपाल को 9 लाख रुपये की अनुसंधान अनुदान राशि स्वीकृत

भोपाल: 10 मई 2025

अब एम्स भोपाल में किडनी सर्जरी 3डी प्रिंटिंग आधारित होगी

एम्स भोपाल के यूरोलॉजी विभाग के एक नवाचारपूर्ण शोध परियोजना के लिए मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (MPCST) द्वारा 9 लाख रुपये की अनुसंधान अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। यह परियोजना किडनी स्टोन की जटिल सर्जरी को अधिक सुरक्षित, सटीक और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह शोध परियोजना डॉ. केतन मेहरा (एसोसिएट प्रोफेसर, यूरोलॉजी विभाग) के नेतृत्व में की जाएगी। परियोजना का उद्देश्य पर्सनलाइज्ड 3डी प्रिंटेड पंक्चर गाइड विकसित करना है, जिससे परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (PCNL) नामक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया को और अधिक कारगर और सुरक्षित बनाया जा सके। यह तकनीक विशेष रूप से जटिल शारीरिक संरचना वाले रोगियों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध हो सकती है। इस बहुविषयक परियोजना में कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के डॉ. विक्रम वट्टी सह-अन्वेषक के रूप में शामिल हैं। स्वीकृत अनुदान राशि में से 7 लाख रुपये एक उन्नत रेज़िन-आधारित 3डी प्रिंटर (DLP/SLA तकनीक) की खरीद हेतु व्यय किए जाएंगे, जबकि शेष 2 लाख रुपये एक जूनियर रिसर्च फेलो (JRF) के वेतन पर दो वर्षों की अवधि में खर्च किए जाएंगे। 3डी प्रिंटिंग तकनीक से रोगी की संरचना के अनुरूप सर्जिकल उपकरण तैयार किए जा सकेंगे, जिससे सर्जरी के दौरान जटिलताओं की संभावना कम होगी, ऑपरेशन का समय घटेगा और मरीजों की सुरक्षा में वृद्धि होगी। यह नवाचार न केवल चिकित्सकों के लिए बल्कि आम नागरिकों के लिए भी बेहतर, सुरक्षित और भरोसेमंद उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

इस उपलब्धि पर प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा, “यह परियोजना सटीकता आधारित तकनीक को सर्जिकल प्रक्रिया में शामिल करने की दिशा में एक सार्थक कदम है। 3डी प्रिंटेड गाइड्स की मदद से जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं जैसे पीसीएनएल को न केवल पर्सनलाइज्ड बल्कि स्टैंडर्डाइज्ड भी किया जा सकेगा, जिससे यूरोलॉजिकल देखभाल में नए मानक स्थापित हो सकते हैं।”