भोपाल: 28 मई 2025
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के मार्गदर्शन में विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस के अवसर पर ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग द्वारा “प्राउड टू प्रोवाइड योर इमर्जेंसी केयर” विषय पर एक दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर चिकित्सा क्षेत्र के अनेक प्रतिष्ठित विशेषज्ञों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लेकर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के महत्व और इसमें कार्यरत कर्मियों की भूमिका पर अपने सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन चिकित्सा पेशेवरों की जीवन रक्षक भूमिका को रेखांकित करना था। साथ ही, उनके लिए बेहतर कार्य स्थितियाँ, सतत प्रशिक्षण तथा मानसिक तनाव से निपटने हेतु पर्याप्त समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया गया। यह आयोजन न केवल चिकित्सा समुदाय, बल्कि आम नागरिकों को भी यह समझाने का प्रयास था कि आपातकालीन चिकित्सा सेवा प्रत्येक व्यक्ति के जीवन से सीधा जुड़ी हुई प्रणाली है, जिसे सशक्त और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम के दौरान प्रमुख चर्चाओं में पशु के काटने की आपात स्थितियों में नवीनतम प्रतिक्रिया पद्धतियाँ, प्राथमिक एवं आपातकालीन देखभाल के मध्य स्पष्ट भिन्नता की समझ, आपातकालीन विशेषज्ञों के कार्य वातावरण को बेहतर बनाने हेतु विधायी सुधार, तथा बर्नआउट और मानसिक तनाव से निपटने की रणनीतियाँ शामिल रहीं।
इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा, “आपातकालीन चिकित्सा प्रणाली किसी भी स्वास्थ्य सेवा ढांचे की रीढ़ होती है। यह न केवल त्वरित निर्णय क्षमता की मांग करती है, बल्कि एक मजबूत टीम, प्रशिक्षण और प्रणालीगत समर्थन की भी आवश्यकता होती है।” ट्रॉमा एवं आपातकालीन चिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रो. (डॉ.) मोहम्मद यूनुस ने कहा, “यह कार्यक्रम उन योद्धाओं को सम्मान देने का प्रयास है, जो सीमित संसाधनों में भी प्रतिदिन जीवन बचाते हैं और जिनके लिए सम्मान व सतत सहयोग आवश्यक है।” कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) मनीषा श्रीवास्तव (निदेशक, बीएमएचआरसी, भोपाल), डॉ. प्रभाकर तिवारी (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भोपाल), डॉ. रूचि टंडन (विभागाध्यक्ष, इमरजेंसी मेडिसिन, जीएमसी भोपाल) एवं डॉ. शहताज खान की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रश्मि वर्मा द्वारा किया गया। साथ ही विभाग के संकाय सदस्य डॉ. भूपेश्वरी पटेल, डॉ. अमित प्रियदर्शी एवं डॉ. श्रुति दुबे ने पैनल चर्चाओं में सक्रिय सहभागिता की। समापन सत्र में प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए।

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