February 13, 2026

एम्स भोपाल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने वर्ष 2024 के लिए वार्षिक आंकड़े प्रस्तुत किए

भोपाल: 04 जनवरी 2025

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के मार्गदर्शन में, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने वर्ष 2024 की वार्षिक सांख्यिकी प्रस्तुति 3 जनवरी 2025 को आयोजित की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभाग की नैदानिक उपलब्धियों और सेवा विस्तार को प्रस्तुत करना था। प्रोफेसर (डॉ.) के. पुष्पलता, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष ने वर्ष 2024 के विस्तृत सांख्यिकी आंकड़े प्रस्तुत किए और पिछले तीन वर्षों के प्रदर्शन की तुलनात्मक समीक्षा की। प्रस्तुति में बाह्य रोगी सेवाएँ जैसे प्रसवपूर्व देखभाल, उच्च जोखिम गर्भावस्था क्लिनिक, कैंसर स्क्रीनिंग और उपचार, इन-पेशेंट सेवाएँ जैसे प्रसव सेवाएँ, सिजेरियन डिलीवरी, उच्च जोखिम गर्भावस्था देखभाल, एंडोस्कोपी और न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी जैसी सर्जिकल सेवाएँ, तथा यूएसजी, सीटीजी और अमनियोसेंटेसिस जैसी डायग्नोस्टिक सेवाएँ शामिल थीं। इस सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर (डॉ.) शिखा मलिक, बाल रोग विभागाध्यक्ष, और प्रोफेसर (डॉ.) जे.पी. शर्मा, एनेस्थिसियोलॉजी विभाग के प्रभारी विभागाध्यक्ष ने की। इसके अतिरिक्त, प्रो. पुष्पलता ने विभाग की आउटरीच कार्यक्रमों, स्वास्थ्य शिविरों, सीएमई, फाउंडेशन डे और कार्यशालाओं में सक्रिय भागीदारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की पहलों, जैसे सुगम मॉडल-ए परिवार नियोजन जागरूकता पहल के सफल कार्यान्वयन के बारे में भी जानकारी दी। बैठक में नवजात शिशु विभाग द्वारा वार्षिक सांख्यिकी प्रस्तुति भी शामिल थी, जिसमें मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए दोनों विभागों के सहयोग को रेखांकित किया गया।

प्रो. पुष्पलता ने एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) अजय सिंह का सतत समर्थन और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रो. डॉ. रजनीश जोशी, डीन (एकेडेमिक्स), प्रो. डॉ. शशांक पुरवार, कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक और प्रो. डॉ. सौरभ सैगल, आईसीयू प्रभारी का भी धन्यवाद किया। प्रो. सिंह ने इस आयोजन के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “वार्षिक सांख्यिकी प्रस्तुति विभाग के मातृ एवं नवजात देखभाल सेवाओं को बेहतर बनाने के सतत प्रयासों का प्रमाण है। नैदानिक सेवाओं और आउटरीच पहलों में सहयोगात्मक प्रगति मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) को कम करने में सहायक है, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य लक्ष्यों के अनुरूप है।” इसमें 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें संकाय सदस्य, सीनियर और जूनियर रेजिडेंट्स, नर्सिंग सुपरवाइजर, नर्सिंग अधिकारी और नर्सिंग छात्र शामिल थे।

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