February 11, 2026

एम्स भोपाल के डॉ. बी. एल. सोनी ने एमपी सर्जन सम्मेलन में साझा किए पेशेंट-स्पेसिफिक इंप्लांट पर अनुभव

भोपाल: 09 अक्टूबर 2025

एम्स भोपाल अपने विशेषज्ञ डॉक्टरों के नवाचारों और उन्नत तकनीकों के माध्यम से मरीजों के लिए बेहतर उपचार के नए रास्ते खोल रहा है। इसी क्रम में, एम्स भोपाल के ट्रामा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर, डॉ. बी. एल. सोनी ने जबलपुर में आयोजित 13वें एमपी चैप्टर एओएमएसआई कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य वक्ता अपने अनुभव साझा किए। इस सम्मेलन में राज्यभर से लगभग 200 जबड़ा और चेहरे के सर्जन शामिल हुए।

अपने व्याख्यान में डॉ. सोनी ने बताया कि किस प्रकार पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट्स (जो मरीज की आवश्यकता के अनुसार विशेष रूप से बनाए जाते हैं) ने चेहरे, जबड़े और खोपड़ी की सर्जरी में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। उन्होंने समझाया कि 3D प्रिंटिंग और सीएनसी मिलिंग (CNC Milling) जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से अब डॉक्टर ऐसे इम्प्लांट तैयार कर सकते हैं जो प्रत्येक मरीज के अनुरूप पूरी तरह फिट बैठते हैं। इससे सर्जरी न केवल अधिक सटीक और सुरक्षित हो जाती है, बल्कि मरीजों की रिकवरी भी तेज होती है।

डॉ. सोनी ने बताया कि यद्यपि सीएनसी मिलिंग थोड़ी महंगी होती है, लेकिन यह 3D प्रिंटेड इम्प्लांट्स की तुलना में अधिक मजबूती और सटीकता प्रदान करती है। अपने 15 वर्षों के सर्जिकल अनुभव में डॉ. सोनी ने कंप्यूटर-असिस्टेड तकनीक और 3D प्रिंटिंग का उपयोग करते हुए 500 से अधिक जटिल सर्जरी की हैं, जिनमें से 50 से अधिक सर्जरी पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट्स से जुड़ी रही हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे इम्प्लांट्स आमतौर पर उन मरीजों के लिए उपयोग किए जाते हैं जो किसी कारणवश नेचुरल बोन ग्राफ्ट्स का उपयोग नहीं कर सकते — विशेष रूप से गंभीर चोटों या उन्नत बीमारियों के मामलों में।

डॉ. सोनी ने एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर, डीन (अकादमिक) प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी और ट्रामा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद यूनुस का धन्यवाद व्यक्त किया, जिन्होंने एम्स भोपाल के फैकल्टी सदस्यों को अपने नवाचारों और अनुभवों को देश और विश्व के मंचों पर साझा करने के लिए प्रेरित किया।

You may have missed