मप्र केबिनेट के अहम फैसले, नए रोजगार और नए उद्यमों पर ज्यादा जोर

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भोपाल: 18 फरवरी 2025

कैबिनेट फैसलों की खास बातें

एससी एसटी, महिला और विकलांग द्वारा उद्योग लगाने पर प्राथमिकता के आधार पर वित्तीय सहायता दी जाएगी। 10 करोड़ से 500 करोड़ रुपये वार्षिक टर्नओवर वाली कंपनियों द्वारा मप्र निवेश करने पर संयंत्र एवं मशीनरी अथवा उपकरण खरीद में 125 करोड़ रुपये तक अनुदान दिया जाएगा।

इसके लिए मप्र के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार देना होगा। इसके साथ ही भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन को ईवी सिटी बनाने की तैयारी का दावा किया गया है, इसमें ईवी वाहनों की खरीद पर राज्य सरकार प्रोत्साहन राशि और कई तरह की छूट प्रदान करेगी।

ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना को भी मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत 273 किलोमीटर लंबी नहर को निर्माण किया जाएगा। इससे 11.76 क्यूबिक मीटर जल का पुनर्भरण (रिचार्ज) किया जाएगा। इससे खंडवा-बुरहानपुर में एक लाख 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित होगी।

सरकार ने दावा किया कि यह अब तक कि सबसे बड़ी रिचार्ज परियोजना है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी ताप्ती मेगा वाटर रिचार्ज परियोजना को लेकर जल्द ही मप्र और महाराष्ट्र के बीच एमओयू हस्तक्षर होगा।

लेक व्यू अशोक को पीपीपी पर ब्रांड होटल बनाया जाएगा

भोपाल के लेक व्यू अशोक होटल पीपीपी पर ब्रांड होटल की तरह डेवलप किया जाएगा। हर साल 10 करोड़ रुपये सरकार को प्राप्त होंगे। 1000 सीट का हाल बनाया जाएगा। होटल के साथ यहां प्रदेश की कला भी देखने को मिलेगी।

इन सात नीतियों पर कैबिनेट की मुहर

एमएसएमई नीति

स्टार्टअप नीति

औद्योगिक भूमि एवं भवन आवंटन नीति

इलेक्ट्रिक वाहन नीति

एकीकृत टाउनशिप नीति

मप्र सिविल एविएशन नीति

बायोफ्यूल नीति

ग्रामीण क्षेत्रों में टाउनशिप का रास्ता साफ

मध्य प्रदेश में शहरों के आसपास कोई भी किसान या निजी व्यक्ति लैंड पुलिंग करके टाउनशिप बना सकेंगे।

इस नीति के तहत स्थानीय निकाय क्षेत्र के भीतर पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए न्यूनतम 10 हेक्टेयर भूमि और पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए भूमि 20 हेक्टेयर आवश्यक होगी।

सड़क की चौड़ाई 24 मीटर से कम नहीं होना चाहिए। 40 हेक्टेयर और उससे अधिक क्षेत्र वाले बड़ी टाउनशिप के लिए मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 30 मीटर आवश्यक होगी।

कुल क्षेत्र के 15 प्रतिशत क्षेत्र में ईडब्ल्यूएस, एलआइजी आवास बनाने होंगे। इसके लिए भूमि दिलाने के लिए डेवलपर या विकासकर्ता विकास प्राधिकरण या अन्य एजेंसियों से अनुरोध कर सकेंगे।

वह आपसी सहमति के आधार पर भूमि दिलाने में भूमिका निभाएगी। यदि परियोजना क्षेत्र में सरकारी भूमि आती है तो अधिकतम आठ हेक्टेयर सीमा की छूट दी जा सकेगी। इसमें लैंड पुलिंग का प्रविधान रखा गया है।