भोपाल: 10 जनवरी 2025
नवनिर्वाचित डीजीपी मप्र द्वारा नववर्ष के उपलक्ष्य में पत्रकार मिलन समारोह रख गया जिसमें बड़ी मात्रा में पत्रकार एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। ये मिलन समारोह कई वर्षों बाद आयोजित किया गया इस से पहले ये समारोह कोविड के पहले आयोजित हुआ था उसके बाद अगले डीजीपी जो भी रहे उन्होंने मीडिया से दूरियां बनाए रखीं। पर कैलाश मकवाना जो कि साफ सुथरी और अनुशासित छवि वाले हैं ने निर्णय लिया कि मीडिया के लोगों से दूर रहने की बजाय उन्हें साथ रखने में किसी को कोई हानि नहीं। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जनसंपर्क विभाग की बड़ी भूमिका रही विशेषतः आशीष शर्मा जो कि जनसंपर्क डीजीपी/पुलिस मुख्यालय की उन्होंने उन समस्त पत्रकारों को मिलन समारोह में न्योता भेजकर पुलिस और पत्रकारों के बीच एक अटूट सेतु का काम किया जो कि पूर्ण रूप से सफल हुआ। मप्र के कई वरिष्ठ पत्रकारों ने मिलकर डीजीपी मकवाना का शाल श्रीफल मोमेंटो इत्यादि देकर सम्मान किया उनमें विनोद सूर्यवंशी (प्रदेश अध्यक्ष एम पी प्रेस क्लब और प्रधान संपादक न्यू भोजराज टाइम्स), सुरेंद्र मिश्रा (प्रधान संपादक जनकल्याण मेल), अजय भटनागर वरिष्ठ एवं अनुभवी पत्रकार, तेजेंद्र भार्गव ( संपादक इंडिया टीवी 18), नितिन गुप्ता ( संपादक नित्य नमन टाइम्स), रवींद्र वैष्णव ( संपादक Times Now24x7 सच जरूरी है), चैनल एक्सप्रेस के चेयरमैन अनिल सिंह, अलका शर्मा वरिष्ठ पत्रकार, वरिष्ठ समाजसेवी एवं डिजियाना ब्यूरो संजीव श्रीवास्तव, हरीश गौड़ (संपादक समय की रफ्तार) और भी अन्य वरिष्ठ पत्रकार सम्मिलित हुए।
डीजीपी कैलाश मकवाना: संक्षिप परिचय
मप्र के नवनिर्वाचित डीजीपी कैलाश मकवाना की गिनती तेज-तर्रार और कड़ी मेहनत करने वाले अफसरों में होती है। उनके कार्यकाल में कई बदलाव आए हैं और वह भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्यवाही के लिए भी पहचाने जाते हैं। कैलाश मकवाना का जीवन पुलिस प्रशासनिक रूप में काफी चुनौतियों भरा रहा। कैलाश मकवाना को तेज़-तर्रार और मेहनती अफसर माना जाता है। उन्होंने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। शिवराज सरकार के कार्यकाल में वह लोकायुक्त के डीजी के रूप में नियुक्त हुए थे, लेकिन महज छह महीने बाद उनका तबादला कर दिया गया। उनके कार्यकाल में लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कई ठंडे बस्ते में पड़ी फाइलें खोलीं और महत्वपूर्ण जांचों को आगे बढ़ाया। इसके अलावा, महाकाल लोक कॉरिडोर के मामले में भी उन्होंने कार्रवाई की थी।
मकवाना का पुलिस विभाग में करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने साढ़े तीन साल के दौरान सात बार अपना स्थान बदला था, जिसमें कमलनाथ सरकार के दौरान तीन बार उनका ट्रांसफर हुआ था। उनके ट्रांसफर की सूची में एडीजी इंटेलिजेंस, एडीजी नारकोटिक्स, एडीजी सीआईडी, और एडीजी प्रशासन जैसी प्रमुख पदों पर कार्य करना शामिल है। 2021 में उन्हें पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन का चेयरमैन बनाया गया था, और फिर 2022 में उन्हें लोकायुक्त का महानिदेशक बनाया गया। हालांकि, लोकायुक्त में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के कारण सरकार ने उन्हें हटाकर पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन में भेज दिया।
कैलाश मकवाना की त्वरित निर्णय क्षमता, भ्रष्टाचार विरोधी कार्यवाही, और प्रशासन में दक्षता के चलते एक प्रभावशाली अफसर है।
कैलाश मकवाना का अकादमिक बैकग्राउंड भी मजबूत है। उज्जैन के रहने वाले कैलाश मकवाना ने मैनिट भोपाल से बीई किया है और आईआईटी दिल्ली से एमटेक की डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने कई प्रमुख पोस्टों पर कार्य किया है, जिनमें अति संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने का अनुभव शामिल है। उन्होंने दुर्ग, मुरैना, जबलपुर, रायपुर, दंतेवाड़ा, मन्दसौर और सागर जैसे विभिन्न स्थानों पर अपनी सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, वह इंटेलिजेंस विभाग में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे हैं।

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