क्या अब समय है पत्रकारों की सुरक्षा से संबंधित कानून बनाने का?

पत्रकारों ने पुलिस प्रशाशन की आंखें खोलने के लिए किया उग्र प्रदर्शन 

भोपाल: 25 मार्च 2025

विस्तार:

भोपाल में एक पत्रकार पर झूठी एफआईआर दर्ज किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण को लेकर भोपाल के सभी पत्रकारों ने पहले कटारा थाने में बाद में पीएचक्यू के सामने धरना प्रदर्शन किया और फर्जी एफआईआर करने वाले थाना प्रभारी को तत्काल सस्पेंड करने की मांग की।

मुख्य घटना:

जानकारी के अनुसार, स्थानीय पत्रकार ने हाल ही में क्षेत्र में हो रहे अनियमित कार्यों और प्रशासनिक लापरवाहियों को उजागर किया था। इसके बाद अज्ञात कारणों से संबंधित थाना क्षेत्र में पत्रकार के खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करा के उसे जेल में डालने की साजिश रची गई। थाना प्रभारी ने पत्रकार कुलदीप को वेरिफिकेशन के बहने थाने में बुला कर बिना किसी जांच के उसे रात भर थाने में बिठाला और फिर सुबह मेडिकल करा के न्यायालय में पेश करके उसे जेल भेज दिया।पुलिस प्रशासन की इतनी त्वरित कार्यवाही इस बात का अंदेशा जताती है कि ये जो कुछ भी किया गया है इसे पूरी तरह से सुनियोजित करके अंजाम दिया गया है। ऑफ द रिकॉर्ड ये बात चल रही है कि इस पूरे प्रकरण में किसी बड़े नेता और किसी बड़े अधिकारी का हाथ है। क्योंकि कुलदीप ने कई ऐसे खुलासे किए जिस से कहीं न कहीं प्रशाशन और अधिकारियों को कलाई खुलने का डर था। बरहाल सच क्या है ये जांच का विषय है पर अब सवाल ये है कि जांच करेगा कौन और क्या सही में उस व्यक्ति तक जांच पहुंच पाएगी जो इस पूरे प्रकरण का कर्णधार है।इस घटना से सभी पत्रकारों में रोष है और सभी पत्रकारों ने एक होकर इस घटना की निंदा की है।

भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने जमकर दिया पत्रकारों का सांथ:

घटना की जानकारी मिलते ही भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने तत्काल संबंधित थाने पहुंचकर धरना शुरू कर दिया। उनके साथ बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी धरना स्थल पर मौजूद हैं। अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि वो पत्रकारों के सांथ हैं और पत्रकार पर दर्ज झूठी एफआईआर को निरस्त करने की मांग की।

पंकज भदौरिया ने की टीआई को सस्पेंड करने की मांग

वरिष्ठ पत्रकार और रॉयल प्रेस क्लब के अध्यक्ष पंकज भदौरिया ने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी की मिलीभगत से पत्रकार पर झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर दबाव डालते हुए मांग की कि संबंधित थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

पत्रकारों में आक्रोश

इस घटना के विरोध में जिलेभर के पत्रकार संगठनों ने नाराजगी जताई है। पत्रकारों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।

पत्रकारों को मिला सभी पार्टियों का सांथ:

सभी पार्टियों ने चाहे वो कांग्रेस हो या समाजवादी पार्टी सभी ने एक स्वर में इस पूरी घटना की निंदा की और कहा कि पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

भाजपा की ओर से आशीष अग्रवाल ने भी चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने उचित कदम नहीं उठाया तो भाजपा इस मुद्दे को लेकर उग्र आंदोलन करेगी।

पुलिस प्रशासन ने किया थाना प्रभारी को लाइन अटैच:

धरना प्रदर्शन के चलते पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ता देख डीसीपी जोन 2 संजय अग्रवाल ने तत्काल थाना प्रभारी कटारा हिल्स को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।

पत्रकार संगठनों ने की पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग:

इस घटना के बाद अब फिर एक बार पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग उठने लगी है। पत्रकार संगठनों ने अब सरकार से पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर दवाब बनाने की ठानी है। सभी ने सरकार को ज्ञापन देने का मन बना लिया है और शीघ्र ही सभी पत्रकार एक जुट होकर पत्रकार सुरक्षा को लेकर एक प्रस्ताव पारित करेंगे और मुख्यमंत्री से मिलकर इसे कानूनी जामा पहनाने की मांग करेंगे। जैसे पत्रकारों की सुरक्षा के लिए महाराष्ट्र में और छत्तीसगढ़ में पहले से ही कानून लागू है अब मध्यप्रदेश में भी इसे लागू करने की मांग जोर शोर से उठाई जाएगी।