भोपाल: 06 सितंबर 2025
एम्स भोपाल अस्पताल में एक प्रेरणादायी और पुण्य कार्य संपन्न हुआ है। रत्नागिरी निवासी, रायसेन रोड के 55 वर्षीय चंद्रकांत जोशी ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में मानवता की सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने मृत्यु उपरांत अपनी आंखें, त्वचा और शरीर दान कर अनेक जीवनों में आशा की नई किरण जगाई है। यह नेत्रदान मानवता की सेवा का अद्वितीय उदाहरण है, जो कई लोगों को फिर से देखने का अवसर प्रदान करेगा। एम्स भोपाल नेत्रदाता परिवार के इस महान योगदान के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता है। विशेष रूप से हम उनके भाई ललित चंद्र जोशी और बहन निर्मला जी का आभार मानते हैं, जिन्होंने अपने भाई की आंखें दान करवाने का निर्णय लिया।
एम्स भोपाल की टीम इस प्रेरणादायी कदम के लिए नेत्रदाता परिवार की सदैव ऋणी रहेगी। यह कार्य समाज में अंगदान और नेत्रदान के महत्व को रेखांकित करता है तथा अन्य लोगों को भी इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा। हम सभी नागरिकों से निवेदन करते हैं कि ऑर्गन डोनेशन और नेत्रदान के महत्व को समझें और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाएं। नेत्रदान से न केवल दृष्टि लौटती है, बल्कि जीवन में नई उम्मीद और संवेदनशीलता का संचार भी होता है। एम्स भोपाल के नेत्र बैंक एवं नेत्र विज्ञान विभाग इस पुण्य कार्य के लिए दाता परिवार का गहन सम्मान करता है।

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