भोपाल: 27 सितंबर 2025
एम्स भोपाल के डॉक्टर्स ने 10 घंटे लागतार ऑपरेशन कर 50 वर्षीय महिला की जान बचाई। डॉक्टर्स की टीमवर्क व सटीक योजना से यह ऑपरेशन सफल रहा। ऐसे ट्यूमर अधिकतर महिलाओं में पाए जाते हैं और लक्षण अस्पष्ट होने के कारण लंबे समय तक अनदेखे रह जाते हैं। नागरिकों से अपील की गई कि पेट से जुड़ी लगातार समस्याओं को नज़र अंदाज़ न करें और समय पर चिकित्सा परामर्श लें।
एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने पचास वर्षीया महिला को नई ज़िंदगी दी है। चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक 4.3 किलोग्राम वजनी अग्नाशय (Pancreas) का विशाल ट्यूमर निकाल दिया। सामान्य वयस्क में अग्नाशय का वजन केवल 50–125 ग्राम होता है, जिससे यह मामला और भी दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण बन गया।
पिछले एक वर्ष से महिला को पेट में तकलीफ़ और भारीपन की शिकायत थी, जिसे उन्होंने सामान्य अम्लपित्त और कब्ज़ समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया। पेट का आकार बढ़ने पर भी उन्होंने ध्यान नहीं दिया। एम्स भोपाल की ओपीडी में जांच कराने पर उनके पेट में विशाल गांठ का पता चला। आगे की जाँच से यह दुर्लभ अग्नाशय का ट्यूमर पाया गया, जिसका आकार लगभग 23 सेंटीमीटर था और यह चिकित्सा साहित्य में दर्ज सबसे बड़े मामलों में से एक है।
यह ट्यूमर तिल्ली (Spleen) की रक्त वाहिका को अवरुद्ध कर चुका था और पेट में कई नसें (gastric varices) बन गई थीं। इससे पोर्टल हाइपरटेंशन नामक स्थिति उत्पन्न हो गई थी। ऐसे में तिल्ली और अग्नाशय के बाएँ हिस्से को, जो ट्यूमर से प्रभावित था, निकालना पड़ा।
यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल और जोखिमभरा था, क्योंकि पोर्टल हाइपरटेंशन की वजह से भारी रक्तस्राव का खतरा था। महिला का शरीर दुबला था और ट्यूमर इतना बड़ा था कि उसने लगभग पूरा पेट भर लिया था, जिससे सर्जरी करना और भी कठिन हो गया। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अभिनव भगत की मदद से सटीक पूर्व-योजना बनाई गई और ऑपरेशन सफल रहा।

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