एम्स भोपाल के फिजियोलॉजी विभाग की टीम ने एपीकॉन 2024 में इकोकार्डियोग्राफी और स्वायत्त कार्य परीक्षण पर उन्नत कार्यशाला का किया आयोजन

भोपाल: 12 दिसंबर 2024

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के नेतृत्व में संस्थान की शरीर क्रिया विज्ञान टीम ने 11 दिसंबर 2024 को एपिकॉन 2024 के दौरान इकोकार्डियोग्राफी और स्वायत्त तंत्रिका कार्य परीक्षण पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही। कार्यक्रम की शुरुआत एम्स भोपाल के शरीर क्रिया विज्ञान विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. रागिनी श्रीवास्तव के व्याख्यान से हुई। उन्होंने स्वायत्त तंत्रिका कार्य परीक्षण और हृदय गति परिवर्तनशीलता विश्लेषण का विस्तृत परिचय दिया और इनकी विभिन्न चिकित्सीय स्थितियों के निदान और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके बाद, शरीर क्रिया विज्ञान विभाग की सहयोगी प्रोफेसर डॉ. रेखा जिवाने ने ईविंग्स बैटरी परीक्षणों की व्याख्या की, जो स्वायत्त तंत्रिका कार्यों का आकलन करने के लिए स्वर्ण मानक माने जाते हैं। डॉ. जिवाने और एम्स भोपाल की पीएचडी शोधार्थी सुश्री तनुशा पाठक ने इन परीक्षणों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया, जिससे प्रतिभागियों को इन तकनीकों में व्यवहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

 

इस कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रो. सिंह ने कहा, “एम्स भोपाल में, हम चिकित्सा शिक्षा को उन्नत बनाने और नैदानिक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इकोकार्डियोग्राफी और स्वायत्त तंत्रिका कार्य परीक्षण जैसे महत्वपूर्ण नैदानिक क्षेत्रों पर ध्यान देकर, हमारा उद्देश्य है कि चिकित्सकों को सटीक और समय पर उपचार करने में सक्षम बनाया जाए। इससे मरीजों के इलाज के नतीजे बेहतर हो सकेंगे।” कार्यशाला में एम्स भोपाल की शरीर क्रिया विज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. रचना पराशर ने ईविंग्स बैटरी से प्राप्त असामान्य परीक्षण परिणामों की व्याख्या पर एक व्यापक सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने स्वायत्त तंत्रिका कार्यों में गड़बड़ी के नैदानिक प्रभावों पर प्रकाश डाला, जिससे प्रतिनिधियों की समझ गहरी हुई और बेहतर निदान एवं प्रबंधन के लिए नए दृष्टिकोण विकसित हुए। कार्यशाला में आईआईटी दिल्ली के प्रो. के.के. दीपक (पूर्व निदेशक एम्स दिल्ली) और निमहांस, बेंगलुरु के शरीर क्रिया विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. कविराज उद्दुपा जैसे प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भी शामिल हुए। उनकी सहभागिता ने इस कार्यशाला को और अधिक अकादमिक गहराई प्रदान की।

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