उज्जैन.
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से सोमवार को श्रावण मास में भगवान महाकाल की आखिरी सवारी निकलेगी। अवंतिकानाथ भक्तों को एक साथ आठ रूपों में दर्शन देंगे। भगवान चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ पर शिवतांडव, नंदी पर उमामहेश, रथ पर होलकर, घटाटोप, जटाशंकर व श्री रूद्ररूप में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे।
श्रावण मास की अंतिम सवारी
बता दें सोमवार को निकलने वाली श्रावण मास की इस आखिरी सवारी के बाद 4 सितंबर को भादौ मास की पहली तथा 11 सितंबर को श्रावण-भादौ मास की शाही सवारी निकलेगी।
कारवां में यह शामिल
सवारी में सबसे अगे महाकाल मंदिर का प्रतिनिधि रजत ध्वज रहेगा। पीछे पुलिस का अश्वरोही दल, पुलिस बैंड, सशस्त्र बल की टुकड़ी मार्च पास्ट करते चलेगी। इसके ठीक पीछे भस्म रमैया भक्त मंडल के सदस्य शिव प्रिय वाद्य झांझ व डमरू की मंगल ध्वनि करते चलेंगे। इसके बाद भगवान महाकाल की पालकी व अन्य मुखारविंद शामिल होंगे। परंपरागत नौ भजन मंडलियां भी सवारी का हिस्सा रहेगी।

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