इंदौर
हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद नाबालिग बेटी प्रीति ने अपने पिता शिवनारायण बाथम को 28 जून को लिवर दे दिया था। इसके 18 दिन पिता शिवनारायण को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया है। इससे परिवार पूरा खुश है। पिता ने कहा कि मेरी बेटी ने सभी लड़ाई लड़कर मुझे नया जीवन दिया है। मुझे अपनी बेटी पर गर्व है।
पिता ने तारीफ में कुछ ऐसा कहा
उसने यह साबित कर दिया कि वह एक पहलवान की बेटी है। जो किसी भी अखाड़े में लड़ाई लड़ सकती है और जीत भी सकती है। अस्पताल में करीब एक माह से भर्ती था, लेकिन अब डिस्चार्ज होकर काफी अच्छा लग रहा है। हालांकि वह अभी अपने घर बेटमा नहीं जा रहे हैं।
क्योंकि अभी इंफेक्शन का खतरा रहता है। डॉ. अमित बर्फा ने बताया कि मरीज को 18 दिन में सोमवार को डिस्चार्ज कर दिया है। वह खुद से अपना काम भी करने लगे हैं। उनकी हालत में सुधार हो रहा है। हमारी पूरी टीम ने इसके लिए मेहनत की है।
बेटी की लड़ाई हो रही सफल
कानून से लड़ी पहलवान की बेटी प्रीति की लड़ाई अब सफल हो गई है। क्योंकि अब पिता डिस्चार्ज हो गए है। उनकी हालत में सुधार हो रहा है। उसके लिए यह काफी गर्व की बात है कि वह अपने पिता के लिए लड़ी लड़ाई में अब सफलता की ओर है। वह अभी घर पर अपने परिवार के साथ है।

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