एम्स भोपाल में जटिल एवं दुर्लभ पैरा थायरॉइड विकार का सफल उपचार

भोपाल: 5 फरवरी 2025

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के नेतृत्व में संस्थान ने अपनी अद्वितीय चिकित्सा विशेषज्ञता और अंतरविभागीय सहयोग का प्रदर्शन करते हुए एक जटिल पैरा थायरॉइड विकार मामले का सफल निदान और इलाज किया। बेंगलुरु के 37 वर्षीय मरीज बार-बार होने वाले पैंक्रियाटाइटिस से पीड़ित थे और उनकी कई सर्जरियाँ असफल रहीं थी। अप्रैल 2021 में उन्हें गंभीर पेट दर्द के साथ उनकी बीमारी शुरू हुई, जिसे बाद में एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के रूप में पहचाना गया। बेंगलुरु में पित्ताशय की थैली और पैरा थायरॉइड की सर्जरी के बावजूद उनकी स्थिति बिगड़ती रही, और उनके कैल्शियम व पैरा थायरॉइड हार्मोन के स्तर लगातार ऊँचे बने रहे। अंततः कई अस्पतालों के चक्कर लगाने और निराशा बढ़ने के बाद, उन्होंने एम्स भोपाल के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग में इलाज के लिए संपर्क किया।

प्रोफेसर मधुकर मित्तल और उनकी टीम, जिसमें सीनियर रेजिडेंट्स डॉ. सारथ और डॉ. मंगेश शामिल थे, ने कैल्शियम और हार्मोनल मूल्यांकन, न्यूक्लियर स्कैन और 4D-सीटी स्कैन सहित व्यापक परीक्षण किए। इन गहन जांचों से दाहिनी ओर गर्दन की मांसपेशी के पीछे एक असामान्य स्थान पर पैरा थायरॉइड ट्यूमर का पता चला। प्रो. विकास गुप्ता के नेतृत्व में एक कुशल सर्जिकल टीम, जिसमें ईएनटी विभाग के डॉ. गणकल्याण बेहरा (एसोसिएट प्रोफेसर), डॉ. सुहैमा (एसआर) और डॉ. रोहित (जेआर) तथा एनेस्थीसिया विभाग की प्रोफेसर वैशाली वेंडेसकर, डॉ. संदीप (सहायक प्रोफेसर), डॉ. राघव (एसआर) और डॉ. अभिनव (जेआर) शामिल थे, ने ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटा दिया। सर्जरी के दौरान फ्रोजन सेक्शन बायोप्सी द्वारा निदान की पुष्टि की गई। सर्जरी के बाद मरीज के कैल्शियम स्तर 12-13 mg/dl से घटकर 6-7 mg/dl हो गए और पैरा थायरॉइड हार्मोन स्तर 250 pg/ml से घटकर 12-25 pg/ml तक आ गए। प्रो. मित्तल ने बताया कि पैरा थायरॉइड हार्मोन के स्राव के कारण उच्च कैल्शियम स्तर पैंक्रियाटाइटिस और पेट दर्द का कारण बन सकते हैं, जिससे सही निदान का महत्व स्पष्ट होता है।

इस उपलब्धि पर प्रो. सिंह ने कहा, “यह सफलता एम्स भोपाल की उच्च स्तरीय समग्र और बहु-विभागीय स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जटिल मामलों के सफल उपचार ने संस्थान की उन्नत चिकित्सा तकनीकों की दक्षता और सही निदान के साथ सहयोगात्मक दृष्टिकोण की अहमियत को साबित किया है।” रोगी ने अपने स्वास्थ्य लाभ में योगदान के लिए चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शशांक पुरवार सहित पूरी चिकित्सा टीम के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।