August 14, 2026

एम्स भोपाल ने नेत्रदान के माध्यम से तीन लोगों की जिंदगी में लाई रोशनी

भोपाल: 5 फरवरी 2025

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के मार्गदर्शन में, अस्पताल के कॉर्नियल रिट्रीवल प्रोग्राम के तहत एक जीवन-परिवर्तनकारी नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसने तीन व्यक्तियों की दृष्टि को पुनर्स्थापित किया। भोपाल के 30 वर्षीय शुभम यादव ने मरणोपरांत अपनी दोनों आँखों की पुतली एम्स भोपाल को दान कर दीं। उनके परोपकारी कार्य ने जरूरतमंदों के जीवन को प्रकाशमय कर दिया है, जो अंग दान के परिवर्तनकारी प्रभाव को प्रदर्शित करता है। एम्स भोपाल के नेत्र विज्ञान विभाग ने दाता के परिवार के साथ विस्तृत परामर्श किया और नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया। दान की गई कॉर्निया का उपयोग तीन महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए किया गया। पहली आँख की पुतली एक 74 वर्षीय मरीज़ को प्रत्यारोपित किया गया, जिनकी आंख की एंडोथेलियल परत एक पुराने ऑपरेशन के दौरान खराब हो गई थी। इस प्रत्यारोपण ने उनकी दृष्टि को बहाल कर जीवन में नई स्पष्टता लाई। पहली आँख की पुतली का दूसरा हिस्सा 16 वर्षीय लड़की को प्रत्यारोपित किया गया जो स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम से ग्रसित थी, जिससे उसकी जिंदगी में एक नई आशा और उजाला आया। दूसरी आँख की पुतली को 50 वर्षीय पुरुष को लगाया गया, जिनकी आंख बचपन की चोट के कारण सफेद हो गई थी। इस प्रत्यारोपण ने उनकी दृष्टि को भी नया प्रकाश दिया। तीनों ऑपरेशन एम्स भोपाल की समर्पित मेडिकल टीम द्वारा सफलतापूर्वक किए गए।

इस नेक कार्य पर अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रोफेसर सिंह ने कहा, “यह उल्लेखनीय नेत्रदान मानवता और उदारता की शक्ति का प्रतीक है। शुभम यादव और उनके परिवार द्वारा लिया गया यह निर्णय जीवन का सच्चा उपहार है। एम्स भोपाल दाता परिवार के इस बहुमूल्य योगदान के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता है। उनका यह निस्वार्थ कार्य अन्य लोगों को भी नेत्रदान के जीवन परिवर्तित करने वाले महत्व पर विचार करने के लिए प्रेरित करेगा।”

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