एम्स भोपाल के कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग ने हार्ट फेलियर के सर्जिकल प्रबंधन पर सीएमई के साथ मनाया फाउंडेशन दिवस

भोपाल: 27 अप्रैल 2025

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के मार्गदर्शन में कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग ने शनिवार, 26 अप्रैल 2025 को अपना फाउंडेशन डे मनाया। इस अवसर पर “हृदय विफलता (हार्ट फेलियर) के सर्जिकल प्रबंधन” विषय पर एक सीएमई (कंटिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से आए विशेषज्ञों, डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य हृदय विफलता के सर्जिकल इलाज से जुड़ी नई तकनीकों, अनुभवों और चुनौतियों पर चर्चा करना था। सत्रों में हृदय-फेफड़े का प्रत्यारोपण, बच्चों के लिए प्रत्यारोपण, सर्जरी से पहले की तैयारी और भारत में वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस (वीएडी) के भविष्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ

वैज्ञानिक सत्रों में एमजीएम हेल्थ केयर, चेन्नई से आए दो प्रमुख विशेषज्ञों – डॉ. के.आर. बालकृष्णन और डॉ. सुरेश राव के.जी. ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। डॉ. बालकृष्णन ने एंड-स्टेज हार्ट फेलियर और वीएडी इम्प्लांटेशन से जुड़ी जानकारियाँ साझा कीं, वहीं डॉ. सुरेश राव ने कार्डियक क्रिटिकल केयर, ECMO और जन्मजात हृदय रोगों पर अपने अनुभव बताए। सभी वैज्ञानिक सत्रों के अंत में एक इंटरएक्टिव पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में उपनिदेशक (प्रशासन) कर्नल (डॉ.) अजीत कुमार, (डॉ.) रजनीश जोशी (डीन, एकेडमिक्स) और डीन (अनुसन्धान) प्रो. (डॉ.) रेहान उल हक की विशेष उपस्थिति रही। यह आयोजन डॉ. योगेश निवारिया (आयोजक अध्यक्ष), डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव (आयोजक सचिव) और डॉ. राहुल शर्मा (संयुक्त आयोजक सचिव) के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आयोजन समिति में विभाग के कई संकाय सदस्यों – डॉ. एम. किशन, डॉ. विक्रम वट्टी, डॉ. आदित्य सिरोही, डॉ. भुषण शाह, डॉ. नागभूषणम पदाला, डॉ. दुरी रविशंकर, डॉ. नितिन राज, डॉ. अभय प्रताप सिंह, डॉ. अरविंदा ऋषि, डॉ. नित्यं गर्ग, डॉ. दीपेश शर्मा, डॉ. इमरेज सरफराज और डॉ. शिवम गौतम – का सराहनीय योगदान रहा।

इस अवसर की महत्ता को बताते हुए प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा, “यह फाउंडेशन डे हमारे कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग की उपलब्धियों का उत्सव था। साथ ही, यह शैक्षणिक उत्कृष्टता और मरीजों की बेहतर देखभाल के लिए हमारे प्रयासों की पुष्टि भी करता है। हृदय विफलता के सर्जिकल प्रबंधन पर आयोजित सीएमई ने देशभर के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर विचार-विमर्श का अवसर दिया और जटिल सर्जरी में हो रही प्रगति को बढ़ावा दिया।” साथ ही, उन्होंने विभाग को मध्य भारत का प्रथम हृदय प्रत्यारोपण के लिए बधाई भी दी।