अशोकनगर बायपास परियोजना में करोड़ों के भूमि घोटाले की आशंका! एलायमेंट बदलने, गरीबों की पट्टे की जमीनों की बिक्री और भूमाफियाओं की कथित खरीद-फरोख्त पर उठे गंभीर सवाल

भोपाल/अशोकनगर: 24 जुलाई 2026

अशोकनगर में प्रस्तावित बायपास परियोजना अब गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। परियोजना के एलायमेंट (मार्ग) में बदलाव, अनुसूचित जाति के गरीब परिवारों को आवंटित अहस्तांतरणीय पट्टे की जमीनों की बिक्री के लिए बड़ी संख्या में अनुमतियां जारी किए जाने तथा प्रस्तावित मार्ग के आसपास बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।

आरोप है कि अधिकारियों, भूमाफियाओं और प्रभावशाली लोगों की कथित मिलीभगत से पहले बायपास का प्रस्तावित मार्ग बदला गया और उसके बाद नए मार्ग के आसपास सैकड़ों बीघा जमीनों की खरीद-फरोख्त कराई गई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य कुछ चुनिंदा लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाना था।

350 बीघा से अधिक जमीन की खरीद-फरोख्त का दावा

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, बायपास परियोजना की स्वीकृति के बाद प्रस्तावित मार्ग के आसपास करीब 350 बीघा से अधिक भूमि की खरीद-बिक्री हुई। बताया जा रहा है कि इन जमीनों की रजिस्ट्रियां केवल स्थानीय लोगों के नाम पर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मंदसौर सहित अन्य जिलों और राज्यों के लोगों के नाम पर भी कराई गईं।

आरोप है कि जिन क्षेत्रों से नया बायपास प्रस्तावित किया गया, वहां पहले से ही योजनाबद्ध तरीके से जमीनें खरीदी गईं, ताकि भविष्य में उनकी कीमत कई गुना बढ़ने का लाभ लिया जा सके।

दो दिनों में 50 से अधिक बिक्री अनुमतियां, सवालों के घेरे में प्रशासन

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू अनुसूचित जाति के गरीब परिवारों को पट्टे पर मिली अहस्तांतरणीय जमीनों से जुड़ा है।

आरोप है कि तत्कालीन कलेक्टर द्वारा 20 और 21 जनवरी 2026 को मात्र दो दिनों के भीतर 50 से अधिक पट्टे की जमीनों की बिक्री की अनुमति जारी कर दी गई। इनमें अधिकांश जमीनें प्रस्तावित बायपास के आसपास स्थित बताई जा रही हैं।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन अनुमतियों के आधार पर कई जमीनों की रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं, जबकि कुछ मामलों में प्रक्रिया अभी भी जारी है। इतने कम समय में बड़ी संख्या में अनुमतियां जारी होने को लेकर प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

एलायमेंट बदलने के पीछे क्या है कहानी?

जिला विकास सलाहकार समिति के सदस्य प्रताप भानसिंह यादव (पप्पू रातीखेड़ा) ने आरोप लगाया है कि प्रारंभिक योजना के अनुसार बायपास रुसल्ला, इटवा और मलखेड़ी रोड से होकर प्रस्तावित था।

उनका कहना है कि बाद में डीपीआर में बदलाव कर मार्ग को रातीखेड़ा क्षेत्र की ओर स्थानांतरित कर दिया गया। आरोप है कि इसी बदलाव के बाद संबंधित इलाके में बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद शुरू हुई।

उन्होंने यह भी दावा किया कि नई डीपीआर में बायपास की लंबाई लगभग तीन किलोमीटर बढ़ा दी गई, जिससे परियोजना की लागत पर भी असर पड़ सकता है।

किसानों को नहीं मिलेगा प्रस्तावित लाभ?

प्रताप भानसिंह यादव का कहना है कि मूल योजना का उद्देश्य ईसागढ़ और नई सराय रोड क्षेत्र के किसानों को कृषि उपज मंडी तक बेहतर संपर्क उपलब्ध कराना था।

लेकिन यदि नया एलायमेंट लागू होता है तो उन क्षेत्रों के किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा। उनका आरोप है कि सार्वजनिक हित की बजाय कुछ लोगों के निजी हितों को प्राथमिकता दी गई।

उन्होंने कहा कि पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से की जाएगी तथा उच्चस्तरीय जांच की मांग की जाएगी।

केंद्रीय मंत्री को भ्रामक जानकारी देने का आरोप

मामले में यह आरोप भी लगाया गया है कि बायपास परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों द्वारा केंद्रीय मंत्री को प्रस्तावित मार्ग के संबंध में सही जानकारी नहीं दी गई।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि बैठक में बताया गया था कि बायपास रातीखेड़ा, इटवा, मलखेड़ी, मोहरी और विदिशा रोड से होकर निकलेगा, जबकि बाद में सामने आई ड्राइंग में रातीखेड़ा, खैराबान, त्रंबकपुर, भोरा घाटी, भोरा कांछी और पवारगढ़ जैसे गांव शामिल बताए गए।

यदि यह दावा सही पाया जाता है तो परियोजना की पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

बाजार मूल्य से कम कीमत पर जमीन खरीदने के आरोप

दस्तावेजों के हवाले से शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि कई किसानों की जमीनें वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर खरीदी गईं।

बताया गया है कि—

– ग्राम भोरा कांछी के एक किसान की लगभग चार बीघा जमीन करीब 11.86 लाख रुपये में खरीदी गई।

– ग्राम रातीखेड़ा में लगभग 2.24 बीघा जमीन लगभग 11.28 लाख रुपये में खरीदी गई।

– इसी क्षेत्र में लगभग एक हेक्टेयर भूमि करीब 20 लाख रुपये में खरीदे जाने का भी दावा किया गया है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि प्रस्तावित बायपास के आसपास स्थित कृषि भूमि की वास्तविक बाजार कीमत इन दावों से कहीं अधिक है। उनका आरोप है कि किसानों को कम कीमत देकर जमीन खरीदी गई, जबकि भविष्य में इन जमीनों का मूल्य कई गुना बढ़ सकता है।

किसानों को दोहरी मार

स्थानीय लोगों के अनुसार, जिन किसानों की जमीनें पहले प्रस्तावित बायपास मार्ग में थीं, उन्होंने वर्षों तक अधिग्रहण की अनिश्चितता झेली। लेकिन मार्ग बदलने के बाद उन्हें न तो परियोजना का लाभ मिला और न ही भूमि का उचित मूल्य।

दूसरी ओर, नए प्रस्तावित मार्ग के आसपास पहले से जमीन खरीदने वालों को संभावित आर्थिक लाभ मिलने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।

प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार नहीं, अंतिम निर्णय बाकी बताया

अशोकनगर कलेक्टर साकेत मालवीय ने इस संबंध में कहा कि बायपास परियोजना के लिए तीन अलग-अलग डीपीआर तैयार की गई हैं और वर्तमान प्रस्ताव को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन स्तर पर अभी भी मार्ग में बदलाव संभव है और अंतिम निर्णय होने के बाद ही बायपास का अंतिम एलायमेंट तय किया जाएगा।

जांच की मांग तेज

मामले में सामने आए आरोपों के बाद स्थानीय लोगों, किसानों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि एलायमेंट परिवर्तन, भूमि खरीद-फरोख्त और पट्टे की जमीनों की बिक्री में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो इसकी उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन ने कहा है कि परियोजना अभी अंतिम रूप में नहीं है और शासन स्तर पर प्रक्रिया जारी है। ऐसे में आगे की जांच और निर्णय के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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