इंदौर
हुकुमचंद मिल के 5 हजार 895 मजदूरों के भुगतान की प्रक्रिया एक बार फिर उलझ सकती है। मप्र गृह निर्माण मंडल के लिए आचार संहिता के दौरान चुनाव आयोग से मिल मजदूरों के भुगतान के लिए अनुमति प्राप्त करना आसान नहीं होगा। यह अनुमति नहीं मिली तो 29 नवंबर को होने वाली सुनवाई में कोर्ट उस समझौते को निरस्त कर सकती है जिसमें शासन, मप्र हाउसिंग बोर्ड, नगर निगम, मजदूर संघ सहित अन्य देनदारों ने सहमति जताई थी।
समझौते के अनुसार मिल की जमीन पर मप्र हाउसिंग बोर्ड और इंदौर नगर निगम को संयुक्त रूप से आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट लाना है। इसके एवज में मप्र हाउसिंग बोर्ड ने मजदूरों के 174 करोड़ रुपये और इस रकम पर 50 करोड़ रुपये ब्याज इस तरह 224 करोड़ रुपये के भुगतान सहित अन्य देनदारों के भुगतान करना हैं।
इस समझोते को मंत्री परिषद की अंतिम बैठक में स्वीकृति भी मिल चुकी है। इस बीच चुनाव आचार संहिता लग गई। इसके चलते मजदूरों और अन्य पक्षकारों का भुगतान नहीं हो सका।
गुरुवार को इस मामले में हुई सुनवाई में कोर्ट ने मप्र गृह निर्माण मंडल से कहा है कि वह 28 नवंबर तक अनिवार्य रूप से चुनाव आयोग से मजदूरों के भुगतान की अनुमति प्राप्त कर ले, ऐसा नहीं करने पर कोर्ट उक्त समझोता निरस्त कर सकती है।

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