हाथरस
हाथरस में हुए भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी भोले बाबा के भक्त उन्हें दोषी मानने को तैयार नहीं हैं। सूरजपाल उर्फ भोले बाबा के भक्तों का कहना है कि इस घटना के पीछे पुलिस और प्रशासन की लापरवाही है। इतना ही नहीं, इन भक्तों ने यहां तक कहा कि अगर भविष्य में कभी भी भोले बाबा के सत्संग का आयोजन होगा तो वह फिर से वहां जाएंगे। कुछ लोगों ने यहां तक दावा किया कि हम भोले बाबा को मसीहा की तरह से मानते हैं। कुछ भी हो जाए, हमारा भरोसा उनके ऊपर से नहीं डिगने वाला है।
कासगंज के नागला खांजी गांव के रहने वाले सोनपाल जाटव दो जुलाई को हुए हादसे में अपनी पत्नी सीमा को खो चुके हैं। इसके बावजूद भोले बाबा में उनकी आस्था में रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ा है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक वह दो दशक से ज्यादा समय से बाबा से जुड़े हुए हैं। इसी तरह हादसे में सोनपाल की साली बिरमा और उसकी बेटी कुसुम भी घायल हो गईं। दोनों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। बिरमा देवी भी हादसे के लिए पुलिस की लापरवाही को जिम्मेदारी मानती हैं। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस पर्याप्त संख्या में मौजूद होती और सुरक्षा उपायों का ध्यान रखा गया होता तो यह हादसा नहीं होता।
कासगंज के गोढ़ा गांव की रहने वाली मीरा देवी भी हाथरस में हुए सत्संग के दौरान अपनी जान गंवा चुकी हैं। मीरा के पति प्रेमशंकर बताते हैं कि तीन टेम्पो में सवार होकर गांव के करीब 30 लोग वहां पर गए थे। उन्होंने बताया कि बाबा के जाने के तुरंत बाद ही वह भी वहां से चले गए थे। लेकिन पत्नी मीरा देवी चरण रज लेने के चक्कर में गिर पड़ीं और उनकी मौत हो गई। इस दौरान उनकी साली सारिका और ढाई साल की पोती रिंकी भी घायल हो गईं। इसी तरह प्रेमशंकर दो साल से बाबा के सत्संग में जा रहे हैं। उन्होंने हादसे के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि वहां पर एंबुलेंस नहीं थी। कोई भी सीनियर अधिकारी मौजूद नहीं था।

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