September 21, 2026

1,300 से ज्यादा वस्तुओं और 500 से अधिक सेवाओं पर आपको देना पड़ता है टैक्स, एक बड़ा हिस्सा इन-डायरेक्ट टैक्स का होता है

नई दिल्ली
भारतीयों पर लगने वाले 18 से ज्यादा किस्म के करों को तीन वर्गों में बांटा जा सकता है – प्रत्यक्ष कर यानी डायरेक्ट टैक्स, परोक्ष कर यानी इन-डायरेक्ट टैक्स और अन्य कर। प्रत्यक्ष कर में इनकम टैक्स, कारपोरेट टैक्स, सिक्युरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स, गिफ्ट टैक्स, वेल्थ टैक्स शामिल है। इन-डायरेक्ट टैक्स में सेल टैक्स, सर्विस टैक्स, चुंगी शुल्क, आयात शुल्क, वैट और जीएसटी शामिल है। अन्य प्रकार के करों में संपत्ति कर, रजिस्ट्रेशन फीस, टोल टैक्स, शिक्षा शुल्क, मनोरंजन शुल्क, प्रोफेशनल टैक्स शामिल है। कुछ टैक्स से तो बचा जा सकता है, पर हर किसी की राजस्व में कमोबेश भागीदारी तय है।

1,300 से ज्यादा वस्तुओं और 500 से ज्यादा सेवाओं पर टैक्स
सरकार के पास जो राजस्व आता है, उसमें एक बड़ा हिस्सा इन-डायरेक्ट टैक्स का होता है। जीएसटी का भुगतान हर किसी को करना पड़ता है। दवा से लेकर वाहन तक 1,300 से ज्यादा चीजों पर टैक्स लगता है। ज्यादातर सेवाओं की लागत में कर का हिस्सा शामिल रहता है। कंपनियों को भी जो टैक्स चुकाना पड़ता है, उसका अधिकतम हिस्सा वे अपने ग्राहकों से ही वसूलती हैं।

कोई नहीं है टैक्स या बजट से परे
अपने देश में आयकर भले ही बहुत कम लोग चुकाते हैं, पर अन्य तरह के करों का भुगतान करना सबके लिए जरूरी है। किसी को भी यह नहीं सोचना चाहिए कि वह टैक्स या बजट से परे है। अगर वह न भी चाहे, तो भी केंद्रीय बजट का असर उस पर पड़ना तय है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को अपना लगातार सातवां बजट पेश करने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही वह वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड को तोड़ देंगी। छह दशक पहले भारत के वित्त मंत्री के रूप में देसाई ने लगातार छह बजट पेश किए थे। अब तक सीतारमण ने वित्त मंत्री के रूप में अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान छह बजट पेश किए हैं, जिसमें इस साल की शुरुआत में पेश अंतरिम बजट 2024 भी शामिल है। वह लगातार दो कार्यकाल तक सेवा करने वाली एकमात्र महिला वित्त मंत्री भी हैं।

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