भोपाल
मध्य प्रदेश में सक्रिय लगभग 75 नक्सलियों में 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह जानकारी पुलिस की खुफिया रिपोर्ट में सामने आई है। ये सभी अलग-अलग समूह में पुरुषों के साथ काम कर रही हैं। यह भी पता चला है कि कुछ नक्सली प्रेमी-प्रेमिका की तरह रह रहे हैं। गांव के लोगों के साथ संवाद करने, उनकी समस्याएं जानने, पर्चा बांटने, लोगों को बरगलाने या किसी तरह की सहायता मांगने के लिए नक्सली महिलाओं को ही आगे करते हैं। महिलाएं गांव के लोगों के बीच आसानी से घुल-मिल जाती हैं। इससे उन्हें गांव में प्रशासनिक गतिविधियों की जानकारी भी मिलती रहती है। पुरुषों की तरह महिलाएं भी छत्तीसगढ़ या महाराष्ट्र से ही हैं। अधिकतर महिलाओं की उम्र 25 से 40 वर्ष की है।
इस बार मुठभेड़ में नहीं फेंका पर्चा
अभी तक ऐसा होता रहा कि नक्सली मुठभेड़ के दौरान अपने मांगों से जुड़ा पर्चा फेंक कर जाते थे। पिछले दिनों बालाघाट में हुई मुठभेड़ में उन्होंने ऐसा नहीं किया था। यह जरूर पता चला है कि इसके पहले कुछ गांवों में उन्होंने तेंदूपत्ता की राशि बढ़ाने, बांस कटाई की दर बढ़ाने और मजदूरी बढ़ाने के लिए पर्चे फेंके थे। गांव के लोगों का समर्थन पाने के लिए वह ऐसी मांग रखते हैं।
नक्सलियों की मांग के अनुसार नहीं करते काम
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने कहा कि हम उनकी मांग के हिसाब से नहीं बल्कि अन्य विभाग और एजेंसियों से मिलकर विकास की गतिविधियों पर विशेष ध्यान देते रहे हैं। प्रभावित क्षेत्र में संचार सुविधाएं बढ़ाने के लिए मोबाइल टावर का निर्माण, सड़क निर्माण, सरकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने के लिए विशेष शिविर लगाने का काम करते हैं। निजी कंपनियों से कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) से भी काम कराए जा रहे हैं।

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