August 13, 2026

एम्स भोपाल में थोरैकोस्कोपिक द्वारा खाद्य नली से डेन्चर को निकाला गया

भोपाल: 3 फरवरी 2025

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के मार्गदर्शन में, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और कार्डियोथोरैसिक सर्जरी विभागों की एक बहु-विशेषज्ञ टीम ने एक वृद्ध रोगी की खाद्य नली में दुर्घटनावश फिसल गए डेन्चर (नकली दांत) को सफलतापूर्वक निकाला। यह जटिल और नाजुक प्रक्रिया उन्नत थोरैकोस्कोपिक (वीएटीएस) तकनीक का उपयोग करके की गई, जिससे पारंपरिक ओपन-चेस्ट सर्जरी से बचा जा सका। इस रोगी को बेहोशी के कुछ दौरे पड़े थे। शुरू में इसे मिर्गी के कारण माना गया था लेकिन बाद में पता चला कि यह हृदय की समस्या के कारण था जिसके लिए हाल ही में पेसमेकर लगाया गया था। बेहोशी के एक दौरे के दौरान, रोगी के नकली दांत अनजाने में गिर गए। इसके कुछ समय बाद, उन्हें निगलने में कठिनाई होने लगी। चिकित्सा मूल्यांकन के बाद पता चला कि नकली दांत उनकी खाद्य नली में फिसल कर वहीं फंस गयी जिससे कारण खाने में कठिनाई हो रही थी। विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में कई एंडोस्कोपिक प्रयासों के बावजूद, डेन्चर को नहीं निकाला जा सका। फिर रोगी को सर्जिकल हस्तक्षेप के लिए एम्स भोपाल रेफर किया गया।

सर्जिकल टीम का नेतृत्व करने वाले सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. विशाल गुप्ता ने बताया, “नकली दांत एसोफैगल दीवार में गहराई तक घुस गयी थी और उसे छाती के रास्ते सावधानीपूर्वक निकालने की आवश्यकता थी। रोगी को हाल ही में लगाए गए पेसमेकर और संबंधित सर्जिकल जोखिमों को देखते हुए यह एक चुनौतीपूर्ण मामला था।” उनके साथ डॉ. योगेश निवारिया (कार्डियोथोरैसिक सर्जरी), डॉ. जैनब (एनेस्थीसिया), और डॉ. श्रीराम और डॉ. गौरव (सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी) भी इस टीम का हिस्सा थे। टीम ने पारंपरिक ओपन चेस्ट सर्जरी के बजाय थोराकोस्कोपिक तकनीक को चुना ताकि सर्जिकल ट्रॉमा को कम किया जा सके। इस तकनीक ने बड़े त्वचा चीरे की आवश्यकता को समाप्त कर रोगी की रिकवरी को तेज और दर्द को कम किया।” डॉ. गुप्ता ने आगे बताया, “इस तकनीक के माध्यम से डेंचर को सुरक्षित रूप से निकाला गया।”

सर्जरी के दौरान डेंचर की स्थिति का सटीक निर्धारण और निगरानी करने के लिए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पियूष पाठक ने एंडोस्कोपी द्वारा महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रोफेसर सिंह ने इस उपलब्धि के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “यह मामला एम्स भोपाल में उन्नत क्षमताओं और टीमवर्क का एक उदाहरण है। इस तरह की चुनौतीपूर्ण और जीवन-रक्षक स्थिति को हल करने के लिए न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों का उपयोग विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

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