August 22, 2026

एम्स भोपाल के डॉ. सुनील चौहान ने एपीपीआईकॉन-2024 में न्यूरोफिजियोलॉजी में अपने उत्कृष्ट योगदान से संस्थान का मान बढ़ाया

भोपाल: 14 दिसंबर 2024

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के नेतृत्व में फिजियोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुनील चौहान ने एपीपीआईकॉन-2024 सम्मेलन में अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराई। यह सम्मेलन चेन्नई स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में आयोजित किया गया था। डॉ. चौहान ने सम्मेलन में दोहरी भूमिका निभाई—फैकल्टी सदस्य और प्रस्तुतकर्ता के रूप में। उन्होंने सम्मेलन में एच रिफ्लेक्स और रिपीटेटिव नर्व स्टिमुलेशन (आरएनएस) जैसे महत्वपूर्ण न्यूरोफिजियोलॉजिकल तकनीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए। एच-रिफ्लेक्स एक तकनीक है जिसका उपयोग रीढ़ की हड्डी के कार्यात्मकता का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है। यह विशेष रूप से संवेदी और मोटर मार्गों के आकलन में मददगार है। इस प्रक्रिया में एक परिधीय तंत्रिका को स्टिमुलेट किया जाता है और उसके परिणामस्वरूप मांसपेशी प्रतिक्रिया को मापा जाता है, जिससे तंत्रिका तंत्र की सेहत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। रेपेटिटिव स्टिमुलेशन टेस्ट का उपयोग आमतौर पर म्यास्थेनिया ग्रेविस जैसे न्यूरोमस्कुलर जंक्शन विकारों का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है। यह परीक्षण यह समझने में मदद करता है कि बार-बार की तंत्रिका स्टिमुलेशन के दौरान तंत्रिका संकेत मांसपेशियों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचते हैं। इसके अतिरिक्त, डॉ. चौहान ने सीएबीजी रोगियों में सैफेनस नर्व सेंसररी असेसमेंट शीर्षक से एक वैज्ञानिक पोस्टर प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने नसों के आकलन और कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (सीएबीजी) में रोगी देखभाल के परिणामों में सुधार के महत्व पर उपयोगी जानकारी प्रदान की।

 

इस सम्मेलन का उद्घाटन तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री ने किया और इसमें भारत व विदेशों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया। डॉ. चौहान के योगदान पर प्रकाश डालते हुए, प्रो. सिंह ने कहा, “एपीपीआईकॉन-2024 जैसे प्रतिष्ठित सम्मेलनों में भागीदारी एम्स भोपाल की चिकित्सा ज्ञान और रोगी देखभाल को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। डॉ. सुनील चौहान के द्वारा किए गए प्रशिक्षण और शोध प्रस्तुतियाँ संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता और नवाचार के प्रति समर्पण को उजागर करती हैं। उनका कार्य न केवल न्यूरोफिजियोलॉजी के मानकों को ऊंचा उठाता है, बल्कि दूसरों को भी वैज्ञानिक अनुसंधान और नैदानिक उत्कृष्टता की ओर प्रेरित करता है।” एपीपीआईकॉन-2024 अकादमिक चर्चा, पेशेवर नेटवर्किंग और न्यूरोफिजियोलॉजी में नवीनतम प्रगति साझा करने के लिए एक उत्कृष्ट मंच साबित हुआ।

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