August 20, 2026

एम्स भोपाल के शोधार्थियों का एपीपीआईकॉन 2024 राष्ट्रीय सम्मेलन में शानदार प्रदर्शन

भोपाल: 18 दिसंबर 2024

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के मार्गदर्शन में, संस्थान ने एक बार फिर चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता को साबित किया है। एम्स भोपाल के पीएचडी छात्रों ने चेन्नई में आयोजित एपीपीआईकॉन 2024 (एसोसिएशन ऑफ फिजियोलॉजिस्ट्स एंड फार्माकोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया सम्मेलन) में अपने शोध प्रस्तुत किए। सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों में प्रमुख रहा डॉ. राहुल गौर का अध्ययन, जिसमें रिपिटिटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन के जरिए क्रॉनिक लो बैक पेन के प्रबंधन के लिए एक नवीन, गैर-आक्रामक चिकित्सा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया। डॉ. संतोष वाकोडे, डॉ. वरुण मल्होत्रा, और डॉ. सोफिया मुद्दा के मार्गदर्शन में किए गए इस केस स्टडी ने पीड़ा में उल्लेखनीय कमी, हृदय गति परिवर्तनशीलता में सुधार, और रोगियों में बेहतर संज्ञानात्मक प्रदर्शन (P300 लेटेंसी में कमी) प्रदर्शित किया। यह शोध एम्स भोपाल में स्थापित उन्नत आरटीएमएस लैब और संस्थान के अत्याधुनिक चिकित्सा अनुसंधान के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। एक अन्य प्रस्तुति तनुशा पाठक द्वारा दी गई, जिसमें पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) फेनोटाइप्स में नींद, चिंता और जीवन की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया गया। डॉ. सोफिया मुद्दा और डॉ. संतोष वाकोडे के मार्गदर्शन में किए गए इस अध्ययन ने विभिन्न पीसीओएस फेनोटाइप्स के बीच मनोवैज्ञानिक और जीवन गुणवत्ता में महत्वपूर्ण अंतर उजागर किए। गंभीर फेनोटाइप (ए और बी) में कमजोर परिणाम पाए गए, जबकि फेनोटाइप डी में सबसे बेहतर परिणाम देखे गए। यह शोध फेनोटाइप-विशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता और पीसीओएस उपचार में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के समावेश को रेखांकित करता है।

इस सम्मलेन के महत्व पर प्रो. सिंह ने कहा, “यह एम्स भोपाल के लिए गर्व का क्षण है। हमारे छात्र और शिक्षक लगातार ज्ञान और नवाचार की सीमाओं को आगे बढ़ा रहे हैं और स्वास्थ्य देखभाल की सबसे जटिल चुनौतियों का समाधान खोज रहे हैं। एपीपीआईकॉन 2024 हमारे शोधकर्ताओं के लिए एक ऐसा मंच साबित हुआ, जिसने न केवल विज्ञान को आगे बढ़ाने बल्कि रोगी देखभाल में प्रभावशाली योगदान देने की हमारी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।”

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