भोपाल: 24 मई 2025
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह संकाय सदस्यों और छात्रों के बीच अकादमिक उत्कृष्टता और ज्ञान-साझाकरण की संस्कृति को सदैव बढ़ावा देते रहते हैं। प्रो. सिंह से प्रेरित होकर संकाय सदस्य विभन्न शोध कार्यों में असाधारण प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में, पैथोलॉजी और लैब मेडिसिन विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. उज्ज्वल खुराना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थान और देश का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त हुआ। उन्हें 11 से 15 मई, 2025 के दौरान फोर्टेज़ा दा बासो, फ्लोरेंस, इटली में आयोजित 22वें इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ साइटोलॉजी 2025 में मौखिक प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया गया। डॉ. खुराना ने “ट्यूबरकुलस लिम्फैडेनाइटिस के आणविक निदान में फाइन नीडल एस्पिरेशन का मूल्यांकन” विषय पर अपनी प्रस्तुति दी। यह सत्र सिर और गर्दन, संक्रामक रोग खंड के अंतर्गत हुआ, जिसमें प्रस्तुत शोध पत्रों की अध्यक्षता इमाकोलाटा कोज़ोलिनो और डॉ. जुबैर बलूच द्वारा की गई। यह सम्मेलन इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ साइटोलॉजी द्वारा आयोजित किया गया था, जो साइटोलॉजी के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्था है।
यह शोध कार्य एलओपी से मान्यता प्राप्त एक अध्ययन के अंतर्गत किया गया था, जिसे एम्स भोपाल के पैथोलॉजी और लैब मेडिसिन विभाग तथा माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सहयोग से संपन्न किया गया। इस अनुसंधान दल में शामिल थे – डॉ. उज्ज्वल खुराना, डॉ. रिमझिम रस्तोगी, डॉ. आनंद कुमार मौर्य, प्रो. (डॉ.) अलकेश कुमार खुराना, प्रो. (डॉ.) वैशाली वाल्के और सुश्री अंतिशा तिवारी। अपने व्याख्यान में डॉ. उज्ज्वल खुराना ने बताया कि कैसे उन्होंने आर्काइवल एफएनएसी स्मीयर से डीएनए निष्कर्षण, डीएनए मात्रात्मक विश्लेषण, तथा एचएसपी65 और आईएस6110 प्राइमर के माध्यम से न्यूक्लिक एसिड प्रवर्धन किया। यह अध्ययन ताजे एस्पिरेट पर किए गए सीबीएनएएटी परीक्षण के तुलनीय परिणाम प्रदान करता है, जिससे पुरानी स्लाइड्स से भी ट्यूबरकुलोसिस के आणविक निदान की दिशा में नई संभावनाएं खुलती हैं। इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें भारत के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। इस उपलब्धि पर अपनी शुभकामनाएं देते हुए प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा: “डॉ. उज्ज्वल खुराना और उनके अनुसंधान दल की यह उपलब्धि एम्स भोपाल की अनुसंधान क्षेत्र में उत्कृष्टता और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उपस्थिति को दर्शाती है। यह संस्थान में हो रहे उच्च गुणवत्ता वाले शोध और विभिन्न विभागों के बीच सहयोग का प्रतीक है।”

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