August 14, 2026

एम्स भोपाल के डेंटल विभाग के डॉ. अंशुल राय ने सिंगापुर में तंबाकू सुपारी खाने के दुष्प्रभाव पर अपनी रिसर्च प्रेजेंट की

भोपाल: 11 जून 2025

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह संकाय सदस्यों और छात्रों के बीच अकादमिक उत्कृष्टता और ज्ञान-साझाकरण की संस्कृति को सदैव बढ़ावा देते रहते हैं। प्रो. सिंह से प्रेरित होकर संकाय सदस्य विभन्न शोध कार्यों में असाधारण प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में, डॉ. अंशुल राय और उनकी टीम द्वारा की गई शोध को 80 देशों के 2000 से अधिक विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यह शोध ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (OSF)—जिसमें मुँह खुलने में कठिनाई होती है—के उपचार पर केंद्रित है। यह अध्ययन 105 रोगियों पर किया गया, जिनमें से कई 10 वर्षों से अधिक समय से तंबाकू व सुपारी का सेवन कर रहे थे। शोध में यह चिंताजनक तथ्य सामने आया कि लंबे समय तक सेवन करने वाले लोगों में ओएसएफ होने की संभावना अधिक होती है। इन रोगियों में से 8 को आगे चलकर मुँह का कैंसर भी हो गया। यह अध्ययन 9 वर्ष की उम्र से लेकर 70 वर्ष तक के ओएसएफ से पीड़ित मरीजों पर किया गया।

विशेष रूप से यह पाया गया कि पाउच (गुटखा/तंबाकू मिश्रित पदार्थ) का सेवन करने वालों में यह बीमारी अधिक पाई गई। 30 प्रतिशत महिलाएं भी इससे प्रभावित थीं। यहाँ तक कि 10 वर्ष से कम उम्र के 3 बच्चे भी इस बीमारी की चपेट में पाए गए। डॉ. अंशुल राय और उनकी टीम ने पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए अलग-अलग सर्जिकल प्रोटोकॉल विकसित किए, जिससे सटीक और प्रभावी इलाज संभव हो सका। ओएसएफ को एक प्री-मैलिग्नेंट कंडीशन माना जाता है, अतः सभी मरीजों का लंबे समय तक फॉलो-अप किया जाना जरूरी है। एम्स भोपाल के डेंटल विभाग ने मुँह खोलने हेतु एक नया फिजियोथेरेपी प्रोटोकॉल भी विकसित किया, जिसे मरीजों पर प्रयोग किया गया और इसके अत्यंत सकारात्मक परिणाम सामने आए। इस पद्धति से न केवल मुँह की गति में सुधार हुआ, बल्कि मरीजों को एक्सरसाइज करते समय दर्द भी नहीं हुआ। डॉ. राय ने यह भी बताया कि इलाज के दौरान उन्होंने कई नई तकनीकों का विकास किया, जिसके लिए उन्हें मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री से एक पेटेंट और 4 कॉपीराइट भी प्राप्त हुए हैं।

इस उपलब्धि पर प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा— “यह शोध कार्य न केवल चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के लिए भी एक अहम संदेश देती है। तंबाकू और सुपारी के सेवन से होने वाले खतरों को समझते हुए हमें जागरूकता और इलाज दोनों पर एक साथ काम करना होगा। डॉ. अंशुल राय और उनकी टीम ने जिस समर्पण और नवाचार के साथ इस चुनौतीपूर्ण विषय पर काम किया है, वह अत्यंत प्रशंसनीय है।

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