भोपाल
निगम ने अपनी आय बढ़ाने के लिये अब उन दुकानदारों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया हैजो धार्मिक संस्थानों की आड़ में अपना बिजनेस सालों से चला रहे हैं।
राजधानी में नादिरा बस स्टैंड के पास कमाली मंदिर परिसर में बने चैतन्य मार्केट की तकरीबन चार दुकानों को नगर निगम संपत्तिकर जमा करने का नोटिस दिय ातो वहां पर हंडकम्प मच गया। यहां पर दुकानदारों सालों से अपना व्यवसाय कर रहे हैं लेकिन निगम के टैक्स बराबर चोरी कर रहे हैं। गौर तलब हैकि निगम लीज पर या किराये पर या खरीद कर व्यवसाय करने वाली दुकानों और प्रतिष्ठानों से संपत्तिकर लेता है।
हर दुकान से चार हजार रुपए प्रतिमाह का टैक्स
चैतन्य मार्केट की चार सौ से अधिक दुकानों से निगम को प्रति वर्ष चार हजार रुपए वार्षिक का कर मिलेगा लेकिन इसके लिये यह लोग बचाव का रास्ता तलाश रहे हैं। जोन चार के प्रभारी परितोष रंजन परसाई के अनुसार निगम ने इनको नोटिस दिया है उसमें दुकान और प्रतिष्ठान के कागजात जमा कराने को कहा है ताकि उनकी दुकानों की जगह का मूल्यांकन किया जाए।
क्या स्थिति है
निगम ने हमीदियारोड पर मोबाइल के सबसे बड़े चैतन्य मार्केट, बाल निकेतन, बक्फ बोर्ड के बन रहे कामर्शियल कॉम्प्लेक्स, छोला विश्रामघाट की प्रेमकुटी आदिको भी नोटिस दिये हैं। ताकि पता चल सके कि उस जगह पर जो व्यावसायिक कारोबार हो रहा है उसकी क्या स्थिति है। शहर में हालत इस समय यह है कि धािर्मक स्थल, समाजिक संगठनों को दी जगह-जगह के नाम पर सैकड़ों दुकानें व्यापार के लिये लोगों को दी गई है। लेकिन अब निगम की टैक्स वसूली का मामला आया तो यह लोग अपने को बचाने में लगे हैं।

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