September 29, 2026

एम्स भोपाल के छात्रों ने डेंगू और सार्स-कोव-2 निगरानी अनुसंधान में प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते

भोपाल: 25 फरवरी 2025

एम्स भोपाल में अकादमिक उत्कृष्टता और अनुसंधान नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के नेतृत्व में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दिशा में एम्स भोपाल के दो छात्रों को संक्रामक रोग निदान और निगरानी में उनके उत्कृष्ट अनुसंधान योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। द्वितीय वर्ष एमबीबीएस छात्र कृष कौशल जो इंट्राम्यूरल स्टूडेंट्स रिसर्च ग्रांट के प्राप्तकर्ता भी हैं, को छात्र श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनका शोध जिसका शीर्षक है “ऑन-साइट वायरल लोड इम्प्लिकेशन फॉर प्रॉग्नोसिस ऑफ डेंगू डिज़ीज़ यूज़िंग मोबाइल फोन: ए सेमी-क्वांटिटेटिव टेस्ट बेस्ड ऑन एनएस1 इमेज एनालिसिस,” प्रतिष्ठित मार्गदर्शकों प्रो. डॉ. रश्मि चौधरी, प्रो. डॉ. जगत आर. कंवर और श्री आशीष कुमार यादव के निर्देशन में किया गया। यह शोध मोबाइल इमेजिंग और रंग विश्लेषण विधियों का उपयोग करके डेंगू निदान में सुधार लाने की क्षमता रखता है। यह तकनीक एनएस1 एंटीजन स्तर के सटीक और त्वरित मूल्यांकन को सक्षम बनाती है, जिससे गंभीर डेंगू मामलों की शीघ्र पहचान में सहायता मिलती है और संसाधनों के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित किया जाता है।

एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि में सुश्री वृषाली डी पाटिल को अंतर्राष्ट्रीय जैव चिकित्सा विज्ञान अकादमी सम्मेलन (IABSCON)- 2025 में सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुति के लिए “प्रो. नूरुल इस्लाम अवार्ड” से सम्मानित किया गया। उनके शोध का शीर्षक है “सार्स-कोव-2 का स्टूल और सीवेज में सतत निगरानी: जीनोमिक प्रवृत्तियां और प्रकोप रोकथाम के लिए निहितार्थ।” यह अध्ययन प्रो. डॉ. रश्मि चौधरी, प्रो. डॉ. जगत आर. कंवर (एम्स भोपाल), और डॉ. हरजीत सिंह मान (राज्य वायरोलॉजी लैब GMC भोपाल) के मार्गदर्शन में किया गया। यह शोध इंट्रामुरल रिसर्च ग्रांट एम्स भोपाल और आईसीएमआर अनुदान द्वारा वित्त पोषित किया गया था। शोध से निष्कर्ष निकला कि सीवेज निगरानी एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य कर सकती है जो बिना लक्षण वाले वायरस संचरण का पता लगाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को बड़े प्रकोप से पहले कार्रवाई करने में सक्षम बनाती है।

प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा, “युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करना चिकित्सा विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। कृष कौशल और वृषाली डी पाटिल का अभिनव कार्य संक्रामक रोगों से निपटने में नवाचार की शक्ति को दर्शाता है। एम्स भोपाल अपने इंट्राम्यूरल फंडिंग कार्यक्रमों के माध्यम से ऐसे प्रभावशाली अनुसंधान को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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