August 21, 2026

एम्स भोपाल की डॉ. ऋषिका ए को सर्जिकल देखभाल में एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप पर शोध के लिए आईसीएमआर पीजी थीसिस अनुदान प्राप्त 

भोपाल: 17 मार्च 2025

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह संस्थान में शैक्षणिक श्रेष्ठता और ज्ञान के आदान-प्रदान को एक प्रेरक परंपरा के रूप में विकसित कर रहे हैं। उनकी प्रेरणा से संकाय सदस्य और छात्र निरंतर उत्कृष्टता की नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। हाल ही में, एम्स भोपाल के फार्माकोलॉजी विभाग की तृतीय वर्ष की स्नातकोत्तर (एमडी) छात्रा, डॉ. ऋषिका ए. को आईसीएमआर पीजी थीसिस ग्रांट से सम्मानित किया गया है। यह अनुदान उनके शोध अध्ययन “सर्जिकल एंटीमाइक्रोबियल प्रोफाइलैक्सिस (SAP) का मूल्यांकन और स्वच्छ एवं अर्ध-स्वच्छ सर्जरी से गुजरने वाले रोगियों में एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप हस्तक्षेप के कार्यान्वयन का प्रभाव” पर आधारित है।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर, प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने डॉ. ऋषिका ए. को बधाई दी और उनके शोध की सराहना करते हुए कहा: “डॉ. ऋषिका का अध्ययन एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है। अनुसंधान-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR) को संबोधित करना स्वास्थ्य देखभाल गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा में सुधार के लिए अत्यंत आवश्यक है। आईसीएमआर द्वारा यह मान्यता वैज्ञानिक अनुसंधान की नीति निर्माण और नैदानिक अभ्यासों को दिशा देने में महत्त्व को दर्शाती है।”

यह शोध डॉ. बालकृष्ण एस., प्रोफेसर, फार्माकोलॉजी विभाग, एम्स भोपाल एवं डॉ. शिल्पा एन. काओरे, प्रोफेसर, फार्माकोलॉजी विभाग के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इस अध्ययन का उद्देश्य सर्जिकल प्रक्रियाओं में एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के उपयोग को अनुकूलित करना, सर्जिकल साइट संक्रमण (SSIs) को कम करना और एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR) से लड़ना है। यह अध्ययन प्रशिक्षण एवं शिक्षा, संभावित ऑडिटिंग और स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच फोकस ग्रुप चर्चा जैसी हस्तक्षेप रणनीतियों पर केंद्रित है, जिससे राष्ट्रीय (आईसीएमआर) और वैश्विक (WHO) एंटीमाइक्रोबियल दिशानिर्देशों के अनुपालन को बढ़ावा दिया जा सके।

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