September 14, 2026

इन्सानी गतिविधियों के कारण कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन बढ़ा, नहीं चेते तो संकट बढ़ाएगा जलवायु परिवर्तन

नई दिल्ली.

जलवायु इतिहास में अब तक की सबसे तेज मानवजनित कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन (सीओ 2) की दर रिकॉर्ड की गई है। यह दर पिछले 50 हजार वर्षों की तुलना में 10 गुना तेज है। शोधकर्ताओं की अंतरराष्ट्रीय टीम ने प्राचीन अंटार्कटिका की बर्फ का गहन रासायनिक विश्लेषण करके यह पता लगाया है।

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन पृथ्वी के अतीत में अचानक हुए जलवायु परिवर्तन की अवधि के बारे में अहम खुलासा करता है। वैज्ञानिकों ने पिछला रिकॉर्ड पता लगाने के लिए 3.2 किमी गहराई तक ड्रिलिंग कर वहां से एकत्र किए गए बर्फ के नमूनों का उपयोग किया। पता चला कि सैकड़ों हजारों वर्षों में अंटार्कटिका में बनी बर्फ में हवा के बुलबुलों में फंसी प्राचीन वायुमंडलीय गैसें भी हैं। सीओ 2 ग्रीनहाउस गैस है जो वायुमंडल में प्राकृतिक रूप से पाई जाती है। जब यह वायुमंडल में प्रवेश करती है तो ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण जलवायु को गर्म कर देती है। अतीत में हिमयुग चक्रों और अन्य प्राकृतिक कारणों से सीओ 2 के स्तर में उतार-चढ़ाव होता रहा है, लेकिन आज मानवजनित उत्सर्जन के कारण यह तूफानी रफ्तार से बढ़ रहा है।

ये इन्सानी गतिविधियां वजह
बिजली की खपत : जीवाश्म ईंधन से सीओ 2 उत्सर्जित होती है, कोयले से पेट्रोलियम की तुलना में दोगुनी गैस निकलती है। दुनियाभर में जीवाश्म ईंधन से 85 फीसदी बिजली पैदा होती है।

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